UNDP मानव विकास सूचकांक 2021-22 (UNDP Human Development Index 2021-22) : डेली करेंट अफेयर्स

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी UNDP के एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मानव विकास की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। रिपोर्ट कहता है कि साल 2021 में 191 देशों की सूची में भारत 132वें स्थान पर रहा, जबकि साल 2020 में इसी रिपोर्ट में 189 देशों की सूची में भारत 131वें स्थान पर था। इसका मतलब यह हुआ कि रिपोर्ट में भारत की स्थिति में एक पायदान की गिरावट आई है।

क्या है मानव विकास रिपोर्ट?

मानव विकास सूचकांक (HDI) को पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक एवं भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने मिलकर विकसित किया था। ये संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी किया जाने वाला एक वार्षिक इंडेक्स है, जो जीवन प्रत्याशा, स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष, स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष और सकल राष्ट्रीय आय सम्बन्धी मानकों के आधार पर प्रकाशित किया जाता है। साल 2020 में इसमें दो नए घटकों कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन और मैटीरियल फुटप्रिंट को भी जोड़ा गया है। जिससे धरती पर बढ़ते मानवीय दबाव को भी आंका जा सके। इस सूचकांक को सबसे पहले 1990 में जारी किया गया था। तब से हर साल इस सूचकांक और इससे जुड़ी रिपोर्ट को प्रकाशित किया जा रहा है। ताजा रिपोर्ट 8 सितंबर, 2022 को जारी की गई थी। मानव विकास रिपोर्ट, 2021-22 की थीम ‘‘अनिश्चित समय, अनसुलझा जीवन: परिवर्तन में एक दुनिया में हमारे भविष्य को आकार देना’' (Uncertain Times, Unsettled Lives: Shaping our Future in a World in Transformation) है।

मानव विकास सूचकांक के महत्वपूर्ण तथ्य क्या कहते हैं?

ताजा HDI रिपोर्ट में स्विट्जरलैंड सबसे आगे है। नार्वे और आइसलैंड दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। दक्षिण एशियाई देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका शामिल है। केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान (180वां स्थान) निम्न मानव विकास श्रेणी में हैं। तकरीबन 90 फ़ीसदी देश ऐसे हैं जहां साल 2020-21 के दौरान मानव विकास सूचकांक मूल्यों में कमी देखने को मिली है। यह सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिहाज से कतई सही नहीं ठहराया जा सकता। सूचकांक में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण है जीवन प्रत्याशा में गिरावट जोकि साल 2019 के 72.8 वर्ष से घटकर 2021 में 71.4 साल हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी की वजह से, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और जलवायु संकट ने 90 प्रतिशत देशों के मानव विकास सूचकांक पर असर डाला है।

भारत की क्या है स्थिति?

इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 की 191 देशों के मानव विकास सूचकांक में भारत की स्थिति अच्छी नहीं है। HDI में भारत 132वें स्थान पर है, जबकि इससे पहले 2020 में 189 देशों की सूची में भारत इस मामले में एक पायदान आगे यानी 131वें स्थान पर था। मौजूदा सूची में भारत का एडीआई मान 0.6333 है यानी ये मध्यम मानव विकास श्रेणी वाला देश है। देश में औसत आयु 69.7 वर्ष से घटकर 67.2 वर्ष हो गई है। अन्य जिन मानकों के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की जाती है, उनमें एक मुद्दा स्कूली शिक्षा का भी है। भारत में स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष 6.7 हैं जबकि इसे 11.9 वर्ष होना चाहिए। प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 6,590 अमेरिकी डॉलर थी, जबकि लैंगिक असमानता सूचकांक में भारत 122वें स्थान पर है। इस तरह स्वास्थ्य, शिक्षा और औसत आय के आधार पर मानव विकास सूचकांक में 2020 और 2021 में गिरावट दर्ज की गई। भारत इस मामले कई पड़ोसी देशों से पीछे रह गया।

रिपोर्ट का महत्व क्या है?

यह कुछ ऐसे बहुआयामी सूचकांकों में से एक है जिसमें साक्षरता दर, नामांकन अनुपात, जीवन प्रत्याशा दर और शिशु मृत्यु दर जैसे संकेतक शामिल हैं। यह वास्तविक अर्थों में विकास को मापने के लिए एक वास्तविक मानदंड के रूप में माना जा सकता है। प्रति व्यक्ति आय वृद्धि का अर्थ आर्थिक विकास है, जबकि HDI कई अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक संकेतकों पर भी विचार करता है और एक राष्ट्र की प्रगति को मानव कल्याण के अर्थ में मापने में मदद करता है।

रिपोर्ट की किस आधार पर आलोचना की जाती है?

एचडीआई की इस आधार पर आलोचना की जाती है कि ये मानव विकास का सरलीकृत और थोड़ा सीमित मूल्यांकन है। एचडीआई जीवन की गुणवत्ता के ऐसे मानक जैसे कि सशक्तिकरण मूवमेंट या सुरक्षा की समग्र भावना जैसे कारकों को प्रदर्शित नहीं करता। उदाहरण के तौर पर किसी देश में कोई कौम अपने आप को कितना सुरक्षित महसूस करता है इस बात का आंकलन इसमें नहीं किया जाता है। इस इंडेक्स की एक और ख़ामी यह है कि इसमें विकास की जानकारी तो मिलती है, लेकिन उस विकास की गुणवत्ता के बारे में इसमें कुछ नहीं बताया जाता। मसलन केवल यह देखा जाना कि स्कूल में कितने विद्यार्थी हैं, काफी नहीं है; इसके साथ यह भी जरूरी है कि उन्हें मिलने वाली तालीम की गुणवत्ता का स्तर कैसा है।

आगे क्या किया जा सकता है?

भारत के मानव विकास सूचकांक में व्यापक सुधार किया जा सकता है, लेकिन ये तभी संभव होगा जब सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता हो। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाया जाना जरूरी है। कोविड-19 की चुनौतियों से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने और समाज के विभिन्न वर्गों - गरीबों, किसानों तथा श्रमिकों को मुश्किलों से उबारने के लिए उठाये गए कदमों के क्रियान्वनयन पर हरसंभव ध्यान देना होगा। विशेषज्ञ के मुताबिक सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, न्यायसंगत और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं में स्वच्छता जैसे मुद्दों पर रणनीतिक रूप से प्रभावी कदम उठाना होगा।