सोलोमन द्वीप (Solomon Islands) : डेली करेंट अफेयर्स

हाल ही में सोलोमन द्वीप देश ने उनके यहां आने वाले सभी देशों के युद्ध पोतों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध कब तक रहेगा इसको लेकर कोई समय सीमा भी नहीं बताई गई है। ऐसे में, दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है कि क्या चीन वहां पर अपनी धमक बढ़ाने के लिए कोई साजिश तो नहीं रच रहा है।

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यह हिंद प्रशांत क्षेत्र कहां स्थित है?

हिंद (Indo) यानी हिंद महासागर (Indian Ocean) और प्रशांत (Pacific) यानी प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर जो समुद्र का एक हिस्सा बनता है, उसे हिंद प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Area) कहते हैं। विशाल हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के सीधे जलग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाले देशों को ‘इंडो-पैसिफिक देश’ कहा जा सकता है। इस्टर्न अफ्रीकन कोस्ट, इंडियन ओसियन तथा वेस्टर्न एवं सेंट्रल पैसिफिक ओसियन मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाते हैं। हालांकि हिंद महासागर क्षेत्र की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, हर देश अपने हित के मुताबिक इसकी परिभाषा गढ़ता रहता है।

दुनियाभर के देश यहां अपनी पकड़ क्यों मजबूत करना चाहते हैं?

मौजूदा वक्त में, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 38 देश शामिल हैं, जो विश्व के सतह क्षेत्र का 44 फ़ीसदी, विश्व की कुल आबादी का 65 फ़ीसदी, विश्व की कुल GDP का 62 फीसदी और विश्व के माल व्यापार का 46 फ़ीसदी योगदान देते हैं। ये एक लगभग वाला आंकड़ा है। दुनिया के कई देश ऐसे हैं जो इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहते हैं और इस रेस में सबसे ज़्यादा जो दो देश आगे हैं वो हैं अमेरिका और चीन। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे अमेरिका अपनी वैश्विक दबदबे को पुनर्जीवित करने के लिये इसे अपनी भव्य रणनीति का एक हिस्सा मानता है, लेकिन चीन द्वारा इसे लगातार चुनौती दी जा रही है।

यह सोलोमन द्वीप कहां स्थित है?

इस क्षेत्र के अंतर्गत एक महत्त्वपूर्ण देश सोलोमन द्वीप आता है। सोलोमन द्वीप पापुआ न्यू गिनी के पूर्व में मेलानेशिया में स्थित एक राष्ट्र है, जिसमें 990 से अधिक द्वीप शामिल हैं। इसकी राजधानी होनियारा है, जो कि ग्वाडलकैनाल द्वीप पर स्थित है। मेलानेशिया दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में ओशिनिया का एक उपक्षेत्र है। अभी हाल ही में ऐसी खबर आई कि चीन और सोलोमन द्वीप के बीच एक सुरक्षा समझौता हुआ है। इससे दुनिया की चिंता थोड़ी बढ़ गई है, क्योंकि इस समझौते में सोलोमन द्वीप में चीनी नौसैनिक अड्डा स्थापित करने के कदम का जिक्र है। समझौते के मुताबिक चीन के लड़ाकू पोत सोलोमन में रुक सकेंगे और चीन सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद के लिए पुलिस और सशस्त्र बल सोलोमन भेज सकता है। हालांकि, सोलोमन ने कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि चीन वहां सैन्य अड्डा स्थापित करेगा। प्रधान मंत्री मनशेह सोगावरे ने जोर देकर कहा था कि समझौता केवल सोलोमन द्वीप समूह की सहायता के लिए था जिसे उन्होंने "मुश्किल आंतरिक खतरा" कहा था।

अभी यह अचानक चर्चा में क्यों आ गया?

अभी मौजूदा वक़्त क्या हुआ कि सोलोमन द्वीप ने कहा कि वे उनके यहाँ आने वाले युद्धपोतों को दी जाने वाली मंजूरी की जो सरकारी प्रक्रिया है उसकी समीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान दुनियाभर के देश उनके यहां अपने युद्धपोत कतई ना भेजें। सोलोमन द्वीप ने इसको लेकर कोई समय सीमा भी नहीं बताई है। इससे एक बार फिर से दुनिया के सभी बड़े देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि इस दौरान चुपके से चीन वहां अपना नवल बेस बना रहा है। हालांकि सोलोमन द्वीप के प्रधानमंत्री ने इस इस तरह के आशंकाओं का खंडन किया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी एक बार सोलोमन द्वीप ने अमेरिका के युद्धपोतों को अनुमति नहीं दी थी, जिसकी वजह से उसके युद्धपोत ओलिवर हेनरी की यात्रा रद्द करनी पड़ी थी।

चीन को इस सोलोमन द्वीप में इतनी दिलचस्पी क्यों?

चीन प्रशांत द्वीप क्षेत्र को अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लिहाज से बेहद ही महत्वपूर्ण मानता है। खासकर, चीन इस क्षेत्र को अपने तथाकथित एयर सिल्क रोड में एक महत्वपूर्ण एयर फ्रेट हब के रूप में देखता है। बता दें कि एयर सिल्क रोड एशिया को मध्य और दक्षिण अमेरिका से जोड़ता है। अब प्रशांत महासागर में सोलोमन द्वीप समूह की सामरिक स्थिति ऐसी है जो चीन के लिए सैन्य दृष्टिकोण से फायदेमंद साबित हो सकती है। इसीलिए चीन इसमें इतना रूचि ले रहा है।

इस पूरे इलाके को लेकर भारत की क्या सोच है?

भारत इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करने को तत्पर है। भारत के लिये इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का अर्थ एक मुक्त, खुले और समावेशी क्षेत्र से है। भारत चाहता है कि ‘विवाद सम्बन्धी सारे मुद्दे आपसी सहयोग और शांतिपूर्ण तरीके से’ सुलझाए जाएं और ‘समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन एवं समुद्री क्षेत्र के ऊपर से हवाई जहाजों को आने-जाने की आजादी’ को बढ़ावा मिलना चाहिए।