रमन मैग्सेसे पुरस्कार : 'एशिया का नोबल' (Ramon Magsaysay Award : 'Asia's Noble') : डेली करेंट अफेयर्स

कोई भी पुरस्कार अच्छे व्यवहार को और प्रतिस्पर्धी भावना को प्रोत्साहित करने का एक तरीका होता है। यह प्राप्तकर्ता समेत अन्य लोगों को इस बात की प्रेरणा देता है कि वह लोग भी जीवन में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहें। साथ ही यह एक सम्मान की बात भी होती है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति पुरस्कार लेने से मना कर दे और वह पुरस्कार भी कोई साधारण पुरस्कार नहीं बल्कि रमन मैग्सेसे पुरस्कार हो तो मन में सवाल तो उठता ही है।

क्या है पूरा मामला?

केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था। शैलजा को उनके कार्यकाल के दौरान कोविड-19 और निपाह वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में उनके योगदान के लिए नामित किया गया था। लेकिन शैलजा ने अपनी राजनीतिक पार्टी की सर्वसम्मति से इस पुरस्कार को लेने से मना कर दिया। माना जा रहा है कि केके शैलजा पर पार्टी की तरफ़ से अवॉर्ड स्वीकार ना करने का दवाब था।

क्यों दिया जाता है रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड?

इस पुरस्कार को एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इसे साल 1957 में शुरू किया गया था। पुरस्कार की स्थापना के पीछे फ़िलीपींस सरकार के साथ-साथ रॉकफ़ेलर सोसाइटी का भी योगदान है। यह पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में कुछ विशेष योगदान दिया हो और दूसरों की उदारतापूर्वक मदद की है। साल 2008 तक ये पुरस्कार केवल छह श्रेणियों - सरकारी कामकाज में योगदान, समाज सेवा, सामुदायिक नेतृत्व, पत्रकारिता-साहित्य-कला, शांति एवं अंतरराष्ट्रीय सद्भावना के क्षेत्र में काम करने वालों को दिया जाता है। साल 2000 में इसमें एक और श्रेणी 'उभरते नेता' की जोड़ी गई। इस साल ये अवॉर्ड चार लोगों को दिया गया है जिनमें कंबोडिया के मनोचिकित्सक सोथियारा छिम, जापान के नेत्र रोग विशेषज्ञ तदाशी हतोरी, फ़िलीपींस के बाल रोग विशेषज्ञ बर्नाडेट जे मैड्रिड और इंडोनेशिया में रहने वाले फ़्रांसीसी पर्यावरण कार्यकर्ता गैरी बेनचेघि शामिल हैं।

शैलजा ने अवॉर्ड क्यों ठुकरा दिया है?

शैलजा ने ये सम्मान स्वीकार करने से मना क्यों किया है, इसके पीछे उन्होंने तीन कारण गिनाए हैं। शैलजा के मुताबिक़ पार्टी का मानना है कि मंत्री रहते हुए जन-स्वास्थ्य के कामों में केवल उनकी अकेले की सफलता नहीं है बल्कि इसके पीछे पूरी टीम शामिल थी। ये केरल सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के सभी लोगों की मिली-जुली सफलता है। इसके लिए किसी एक को श्रेय नहीं दिया जा सकता। दूसरा, ये अवॉर्ड किसी भी सक्रिय राजनेता को नहीं दिया गया है जबकि शैलजा सीपीएम की सेंट्रल कमेटी की सदस्य हैं, जो पार्टी की निर्णय लेनी वाली सर्वोच्च संस्था है। यानी वो राजनीति में अभी भी सक्रिय हैं। तीसरा, ये सम्मान फ़िलीपींस के जिस नेता रेमन मैग्सेसे के नाम पर दिया जाता है, उनका वामपंथियों के क्रूर उत्पीड़न का इतिहास रहा है।

कौन थे रेमन मैग्सेसे और कम्युनिस्टों को उनसे क्या दिक्क़त है?

रेमन मैग्सेसे फ़िलीपींस के सातवें राष्ट्रपति थे। उनका पूरा नाम रेमन डेल फ़िरेरो मैग्सेसे था। साल 1953 से साल 1957 तक उन्होंने फ़िलीपींस के राष्ट्रपति का पद संभाला फिर बाद में उनकी एक प्लेन क्रैश में मौत हो गई। साल 1946 में फ़िलीपींस जब आजाद हुआ उसके बाद वहां अमीरों और ग़रीबों के बीच की खाई बढ़ती चली गई। यह दूरी इतनी बढ़ गई कि वहां के एक वर्ग ने सरकार के ख़िलाफ़ विरोध शुरू किया। इन आंदोलनकारियों को हुकबालाहाप कहा गया। ये आंदोलनकारी किसानों के हक़ की लड़ाई में जुट गए और ये पूरा आंदोलन कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का आंदोलन बन गया।

रेमन मैग्सेसे उस वक्त फिलीपींस सरकार में डिफेंस सेक्रेटरी थे और इन्होंने इन आंदोलनकारियों को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने आंदोलनकारियों पर सैन्य बल प्रयोग किया था। यानी ये जो पूरा मामला था … पूंजीवाद बनाम साम्यवाद के नज़रिये से देखा जाता है। शायद इसी वजह से सीपीआईएम नेताओं को रेमन मैग्सेस अवॉर्ड लेने में दिक़्क़त है। हालाँकि रेमन मैग्सेसे का नाम ईमानदार नेताओं में भी आता है और उन्होंने कई अच्छे सुधार के काम भी किए थे जैसे कि उन्होंने भूमि सुधार के कामों को काफी प्रभावी ढंग से लागू किया था जिससे गरीबों को काफी फायदा मिला था। इन सुधारों की वजह से ही फ़िलीपींस में उनका नाम अच्छे शासकों में शुमार है।