पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया - "पीएफआई" (Popular Front of India - PFI) : डेली करेंट अफेयर्स

NIA देशभर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़े लिंक पर छापेमारी कर रही है। 11 राज्यों में ये छापेमारी हो रही है। अब तक PFI से जुड़े 106 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम भी शामिल हैं। NIA को PFI से जुड़े लोगों की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी, इसीलिए ये छापेमारी की जा रही है।

PFI क्या है?

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक इस्लामिक संगठन है जिसका गठन 22 नवंबर 2006 को तीन मुस्लिम संगठनों ने मिलकर किया था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिता नीति पसरई शामिल थे। अभी वर्तमान में PFI के अध्यक्ष ओएमए सलाम हैं। PFI खुद को गैर-लाभकारी संगठन बताता है। इसमें कितने सदस्य हैं, इसकी जानकारी तो यह संगठन नहीं देता लेकिन यह दावा करता है कि 20 राज्यों में उसकी यूनिट है। शुरुआत में PFI का हेडक्वार्टर केरल के कोझिकोड में था, लेकिन बाद में इसे दिल्ली शिफ्ट कर लिया गया। PFI की अपनी यूनिफॉर्म भी है और हर साल यह 15 अगस्त को PFI फ्रीडम परेड का भी आयोजन करता है। साल 2013 में केरल सरकार ने इस परेड पर रोक लगा दी थी, क्योंकि PFI की यूनिफॉर्म में पुलिस की वर्दी की तरह ही सितारे और एम्बलम लगे हैं।

PFI पर करवाई क्यों की जा रही है?

अधिकारियों के मुताबिक यह संगठन कथित ‘लव जिहाद’ की घटनाओं, जबरन धर्म परिवर्तन और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ देश के तमाम हिस्सों में हिंसक विरोध प्रदर्शनों आदि को बढ़ावा दे रहा है। इसके अलावा यह युवाओं को इस्लामी कट्टरपंथ बनाने, धन शोधन एवं प्रतिबंधित समूहों से संपर्क रखने और देश के कई अन्य इलाकों में कई हिंसक अपराधों में शामिल था। PFI के कार्यकर्ताओं पर आतंकी संगठनों से कनेक्शन से लेकर हत्याएं तक के आरोप लगते हैं। 2012 में केरल सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि हत्या के 27 मामलों से PFI का सीधा-सीधा कनेक्शन है। इनमें से ज्यादातर मामले RSS और CPM के कार्यकर्ताओं की हत्या से जुड़े थे। इसीलिए एनआईए की ओर से इस संगठन पर कार्यवाही की जा रही है। NIA की तरफ से चलाए गए अबतक के इस सबसे बड़े अभियान को एजेंसी ने 'ऑपरेशन ऑक्टोपस' नाम दिया है।

किस कानून के तहत NIA यह कार्रवाई कर रही है?

PFI के ऊपर यह कार्यवाही ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून के तहत की जा रही है। आपको बता दें कि ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून यानी UAPA को साल 1967 में 'भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा' के उद्देश्य से लाया गया था। इस कानून के तहत किसी भी अलगाववादी गतिविधि को चलाना या समर्थन देना अपराध माना गया है। साथ ही किसी विदेशी ताकत द्वारा भारतीय क्षेत्र को अपना बताना भी अपराध क़रार दिया गया है। इस कानून की धारा 15 में भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा एवं संप्रभुता को संकट में डालने के इरादे से भारत में आतंक फैलाने या आतंक फैलाने की संभावना के इरादे से किया गया कार्य आतंकवादी कृत्य माना गया है। साल 2019 में चौथी बार इस कानून में संशोधन किया गया था।

क्या होगा जब कोई संगठन ‘आतंकवादी संगठन’ के रूप में घोषित हो जाता है?

अभी तक UAPA के तहत कुल लगभग 42 संगठन ‘आतंकवादी संगठन’ के रूप में घोषित किए जा चुके हैं। इस कानून के विभिन्न धाराओं के अंतर्गत जब कोई संगठन ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया जाता है तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इसके अलावा उसके संसाधनों एवं संपत्तियों की जब्ती की जा सकती है। संगठन एवं उसमें शामिल सदस्यों के ऊपर जुर्माने लगाए जा सकते हैं। संगठन के सदस्यों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

आरोपित संगठन के सामने किस तरह के कानूनी विकल्प मौजूद हैं?

इस प्रकार की घोषणा के बाद संगठन या पीड़ित व्यक्ति केंद्र सरकार को एक प्रार्थनापत्र दे सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक रिव्यू कमेटी का गठन कर सकता है। इस कमेटी के निर्णय के आधार पर आरोपित संगठन का नाम ‘आतंकवादी संगठन’ की सूची से हटाया जा सकेगा।