मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) : डेली करेंट अफेयर्स

बीजेपी नेत्री और टिक टॉक स्टार सोनाली फोगाट की मौत से जुड़े रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में गोवा पुलिस ने दावा किया कि फोगाट को उनकी मौत से कुछ घंटे पहले 'मेथामफेटामाइन' नाम की एक ड्रग दी गई थी। पुलिस के मुताबिक़ सोनाली फोगाट के पानी के गिलास में ये ड्रग्स मिलाई गई थी जिसे पीने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और फिर अंत में उनकी मौत हो गई। पुलिस द्वारा इस तरह के दावे के बाद ‘मेथामफेटामाइन’ नाम के इस ड्रग्स को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

पूरा मामला क्या है?

सोनाली फोगाट एक राजनीतिज्ञ और एक्ट्रेस थी, जिनकी बीते 23 अगस्त को गोवा में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मौत के पीछे का कारण हार्ट अटैक बताया गया, लेकिन परिवार की शिकायत और हत्या की आशंकाओं के बीच गोवा पुलिस ने मर्डर की धाराओं के तहत भी जांच शुरू कर दी। जाँच की इसी प्रक्रिया में गोवा पुलिस ने दावा किया कि फोगाट को उनकी मौत से कुछ घंटे पहले 'मेथामफेटामाइन' नाम की ये ड्रग दी गई थी।

मेथामफेटामाइन ड्रग्स क्या है?

मेथामफेटामाइन ड्रग की खोज 1893 में हुई थी। इसे क्रैंक, स्पीड और मैथ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक शक्तिशाली और उत्तेजक नशीला पदार्थ है, जो लोगों के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। वहीं क्रिस्टल मेथमफेटामाइन एक ऐसा ड्रग है, जो शीशे की टुकड़े या चमकदार, नीली-सफेद चट्टान की तरह दिखता है। मेथमफेटामाइन का इस्तेमाल अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) और नार्कोलेप्सी जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

इसे इस्तेमाल कैसे करते हैं?

सोनाली फोगाट वाले मौजूदा केस में पुलिस ने दावा किया है कि उन्हें उनके सहयोगियों ने उनके पानी के गिलास में मेथामफेटामाइन मिलाया था। अमूमन लोग मेथामफेटामाइन को सिगरेट की तरह जलाकर, दवा की तरह निगलकर, नाक के रास्ते खींचकर (हेरोइन की तरह), इंजेक्ट कर या फिर पानी में मिलाकर लेते हैं।

शरीर में जाने के बाद यह हमारे दिमाग में क्या करता है?

जब यह ड्रग हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो यह हमारे दिमाग में डोपामाइन की मात्रा को बढ़ाता है। बता दें कि 'डोपामाइन' हमारे आपके दिमाग में बनने वाला एक प्राकृतिक रसायन यानी हार्मोन है जो संतोष और आनंद की भावनाओं का एहसास कराता है। इसका मतलब यह हुआ कि जब हम अपने आप को बेहद ही खुश महसूस करते हैं तो हमारा मस्तिष्क यही 'डोपामाइन' हार्मोन रिलीज कर रहा होता है। जब शरीर में 'डोपामाइन' का स्तर बढ़ जाता है तो ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है और इंसान आमतौर पर उत्साहित महसूस करता है। यही कारण है कि लोगों को जल्द ही मेथमफेटामाइन की लत लग जाती है और वो ख़ुद को उत्साहित और ऊर्जावान रखने के लिए आदतन इसका इस्तेमाल करने लगते हैं। गौरतलब है कि इसके ज़्यादा इस्तेमाल से मौत भी हो सकती है।

यह दिमाग में जो कुछ करता है उसका असर क्या होता है?

जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि मेथामफेटामाइन के इस्तेमाल से शरीर में अत्यधिक ऊर्जा का एहसास होता है। इसके अलावा, भूख कम हो जाती है; सांसें, ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं और शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। इसे ज़्यादा मात्रा में लेने पर कार्डियक अरेस्ट हो सकता है और लंबे समय तक लेने से एचआईवी और हेपटाइटिस B और C का ख़तरा भी होता है।

इस संबंध में आंकड़े क्या कहते हैं?

एक आंकड़े के मुताबिक साल 2017 में ड्रग ओवरडोज से होने वाली मौतों में से लगभग 15 प्रतिशत मौतें अकेले मेथामफेटामाइन के कारण हुई थीं। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के मुताबिक़ मेथम्फेटामाइन के ओवरडोज़ से साल 2019 में लगभग 16,500 से अधिक मौतें हुई थी। भारत की ड्रग कंट्रोल एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने भी साल 2016 में क्रिस्टल मेथमफेटामाइन के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताई थी।

भारत में क्या है ड्रग्स पर नीति?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत राज्य को यह अधिकार है कि वह ड्रग्स नियंत्रण और रोकथाम के लिए कानून बना सकता है। इस आधार पर संसद ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रापिक सब्सटैंस एक्ट यानी NDPS एक्ट 1985 और NDPS एक्ट 1988 दो मुख्य कानून बनाए हैं। इस कानून के मुताबिक नारकोटिक ड्रग्स या फिर किसी भी नियंत्रित केमिकल या साइकोट्रॉपिक पदार्थ का उत्पादन, उन्हें रखना, बिक्री, खरीदी, व्यापार, आयात-निर्यात और इस्तेमाल किया जाना प्रतिबंधित है। सिर्फ मेडिकल या वैज्ञानिक कारणों से विशेष मंज़ूरियों के बाद इसका इस्तेमाल संभव हो सकता है। बता दें कि कोकीन से लेकर गांजे तक सवा दो सौ से ज़्यादा ऐसे साइकोट्रॉपिक और ड्रग्स की सूची है, जो NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं। इनके किसी भी तरह के मिश्रण को अगर आप अपने पास रखते हैं, इस्तेमाल करते हैं या किसी तरह भी इसका व्यापार करते हैं, तो इसका मतलब आपने कानून का उल्लंघन किया है और इस आधार पर आपको सजा हो सकती है। सज़ा इस बात पर तय होगी कि आपने कानून कैसे और कितना तोड़ा है।

भारत में ड्रग स्मगलिंग के बड़े स्रोत कौन-कौन से हैं?

भारत दुनिया में दो प्रमुख अवैध अफीम उत्पादन क्षेत्रों के बीच में स्थित है। एक तरफ इसके पश्चिम में गोल्डन क्रीसेंट यानी ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान मौजूद है, तो दूसरी तरफ इसके पूरब में गोल्डन ट्रायंगल यानी दक्षिण-पूर्व एशिया मौजूद है। भारत की यह दोनों तरफ की सीमाएं ड्रग तस्करी के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं। ड्रग्स माफिया इन दोनों क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर ड्रग्स की स्मगलिंग करते हैं।

आधुनिक जीवन के इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में तनाव और समस्याओं ने इंसान को नशे की ओर धकेलना शुरू कर दिया है। आज की युवा पीढ़ी जो अपनी काबिलियत और रचनात्मकता के बल पर राष्ट्र निर्माण की सीढ़ी बन सकते थे, वे आज गलत संगति या थोड़ी देर की खुशी पाने के चक्कर में जहरीली और नशीली ड्रग्स का शिकार हो रहे हैं। जरूरत है कि हमें समय रहते न केवल स्वयं बल्कि आसपास के लोगों को जागरूक करना चाहिए।