वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC : Financial Stability and Development Council) : डेली करेंट अफेयर्स

बीते 15 सितम्बर को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद यानी FSDC की 26वीं बैठक आयोजित की गई। FSDC ने वैश्विक अनश्चितताओं को देखते हुए वित्तीय क्षेत्र में जोखिम पर लगातार नजर बनाये रखने की जरूरत बताई ताकि किसी भी समस्या का समय रहते निपटान किया जा सके। बैठक में 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान उठाये जाने वाले वित्तीय क्षेत्र के मुद्दों के संबंध में तैयारियों पर भी गौर किया गया। परिषद ने अर्थव्यवस्था के लिये शुरुआती चेतावनी संकेतकों और उनसे निपटने की तैयारी, मौजूदा वित्तीय/ कर्ज से जुड़ी सूचना व्यवस्था की दक्षता में सुधार और महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों में संचालन तथा प्रबंधन के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।

अगर हमारे बाजारों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहे यानी वित्तीय स्थिरता न रहे तो निवेशक रिस्क नहीं लेना चाहेंगे और इस तरह आर्थिक गतिविधियां कम होने लगेंगी। यह किसी भी अर्थव्यवस्था के लिहाज से अच्छा नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, हमारे वित्तीय क्षेत्र का विकास कैसे हो; वित्त से जुड़ी जो बड़ी-बड़ी एजेंसियां हैं उनके बीच में समन्वय किस तरह से हो; लोगों को वित्तीय रूप से साक्षर कैसे बनाया जाए और उन्हें संगठित वित्तीय व्यवस्था में कैसे शामिल किया जाए … यह तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जिन पर ध्यान दिए बिना विकास संभव नहीं है। इसी तरह के मुद्दों के समाधान के लिए एक संस्था बनाई गई है जिसका नाम है - वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC)।

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद का गठन रघुराम राजन समिति की सिफारिशों के आधार पर 30 दिसंबर, 2010 को किया गया था। इसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री द्वारा की जाती हैं। इसके सदस्यों में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर, वित्त सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव, वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार, सेबी के अध्यक्ष, इरडा के अध्यक्ष और पी.एफ.आर.डी.ए. के अध्यक्ष को शामिल किया जाता है। FSDC का काम वित्तीय स्थिरता, वित्तीय क्षेत्र के विकास, अंतर-नियामक समन्वय, वित्तीय साक्षरता, वित्तीय समावेशन और बड़ी वित्तीय कंपनियों के कामकाज समेत अर्थव्यवस्था से जुड़े छोटे-छोटे मुद्दों का विवेकपूर्ण सुपरविज़न करना है। ग़ौरतलब है कि इस परिषद को अपनी गतिविधियों के लिये अलग से कोई कोष आवंटित नहीं किया जाता है।