डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 130वीं जयंती : डेली करेंट अफेयर्स

डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 130वीं जयंती

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में (14 अप्रैल, 2021) डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 130वीं जयंती मनायी गई है।

14 अक्टूबर : डॉ. भीम राव अंबेडकर के ...

डॉ. बी. आर. अंबेडकर

  • भारत के संविधान निर्माता, चिंतक और समाज सुधारक डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था।
  • उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई रामजी सकपाल था।
  • उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों जैसे- छुआछूत और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष में लगा दिया। इस दौरान बाबा साहेब गरीब, दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे।
  • 1927 में अम्बेडकर ने महार सत्याग्रह भी किया था।
  • अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर, 1956 को अपने कई अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था।
  • उनका निधन 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ। जिसे हर साल महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • अम्बेडकर को वर्ष 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान दिया गया था।

संविधान निर्माण में योगदान

  • आजादी के कुछ दिन बाद 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने संविधान का मसौदा तैयार करने के लिये डॉं. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया।
  • इस प्रकार भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे ।

डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विचार व शिक्षाएं

  • उनके विचार व सिद्धांत भारतीय राजनीति के लिए हमेशा से प्रासंगिक रहे हैं। दरअसल वे एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के हिमायती थे, जिसमें राज्य सभी को समान राजनीतिक अवसर दे तथा धर्म, जाति, रंग तथा लिंग आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए। उनका यह राजनीतिक दर्शन व्यक्ति और समाज के परस्पर संबंधों पर बल देता है।
  • डॉ. अम्बेडकर समानता को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे। उनका मानना था कि समानता का अधिकार धर्म और जाति से ऊपर होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी समाज की प्रथम और अंतिम नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
  • भारत में इस स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 14 से 18 में समानता का अधिकार का प्रावधान करते हुए समान अवसरों की बात कही गई है।
  • अम्बेडकर ने वर्ण व्यवस्था को अवैज्ञानिक, अत्याचारपूर्ण, संकीर्ण तथा गरिमाहीन बताते हुए इसकी कटु आलोचना की थी।

डॉ. बी. आर. अंबेडकर की रचनाएँ

  • डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने ‘The problem of the rupee : 15 origin and its solution’ नामक अपनी रचना में 1800 से 1893 के दौरान, विनिमय के माध्यम के रूप में भारतीय मुद्रा (रुपये) के विकास का परीक्षण किया और उपयुक्त मौद्रिक व्यवस्था के चयन की समस्या की भी व्याख्या की।
  • अम्बेडकर ने 1918 में प्रकाशित अपने लेख भारत में छोटी जोत और उनके उपचार (Small Holdings in India and their Remedies) में भारतीय कृषि तंत्र का स्पष्ट अवलोकन किया था।
  • उनके एक अन्य शोध ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकास (The Evolution of Provincial Finance in British India) की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
  • 3 अप्रैल, 1927 को अम्बेडकर ने 'बहिष्कृत भारत' नाम का एक अखबार भी शुरू किया था।

हिंदू कोड बिल

  • अम्बेडकर ने स्वतंत्र भारत के प्रथम विधिमंत्री रहते हुए ‘हिंदू कोड बिल’ संसद में प्रस्तुत किया और हिन्दू स्त्रियों के लिए न्याय सम्मत व्यवस्था बनाने के लिए इस विधेयक में उन्होंने व्यापक प्रावधान रखे।
  • हालांकि संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने पर उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी।