यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: सभी उपकरणों के लिए सामान्य चार्जर (Push for Common Charger)

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार सभी उपकरणों के लिए एक समान चार्जर अपनाने पर जोर दे रही है।
  • हाल ही में, यूरोपीय संघ ने 2024 तक छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक यूएसबी-सी पोर्ट सामान्य चार्जिंग मानक को अपनाने की घोषणा की। इसी तरह की मांग अमेरिका में भी हो रही है।
  • इन दिनों उपभोक्ताओं के पास विभिन्न डिवाइस हैं और उनमें से कई के पास अलग-अलग तरह के चार्जर या चार्जिंग पोर्ट हैं जो उपभोक्ताओं को अपने उपकरणों के लिए कई चार्जर ले जाने के लिए मजबूर करते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अलग-अलग चार्जर के मामले पर चर्चा करने के लिए सरकार ने 17 अगस्त, 2022 को उद्योग से संबंधित हितधारकों की एक बैठक बुलाई।

यूएसबी-सी

  • USB का अर्थ ‘यूनिवर्सल सीरियल बस’ है जो कम दूरी के डिजिटल डेटा संचार के लिए एक उद्योग मानक है।
  • USB-C इस मानक का नवीनतम स्टैंडर्ड और सिमेट्रिकल है ताकि इसे किसी भी तरह से इनसर्ट किया जा सके।
  • यूएसबी-सी एक एकल केबल है जो डेटा, ऑडियो, वीडियो और पावर संचारित (Transmit) कर सकती है।
  • उदाहरण के लिए, आप USB-C केबल का उपयोग करके अपने लैपटॉप को बाहरी मॉनिटर से कनेक्ट कर सकते हैं। यह यूएसबी 2.0 से काफी तेज है।

कॉमन चार्जर की जरूरत:

  • भारत के प्रधानमंत्री ने पिछले साल ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी 26) में पर्यावरण के लिए जीवन शैली "LiFE" की अवधारणा दी थी।
  • भारत का अपडेटेड राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य 2030 तक, सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम करने को प्रतिबद्ध है।
  • जलवायु परिवर्तन से लड़ने की प्रतिबद्धता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करने के संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
  • पुराने और नए उपकरणों के बीच चार्जिंग पोर्ट की असंगति के कारण उपभोक्ताओं को हर बार नया गैजेट खरीदने पर एक अलग चार्जर और केबल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
  • इस तर्क के आधार पर सरकार हर घर में एक से अधिक चार्जर रखने की अतिरेक को समाप्त करने पर विचार कर रही है।

सर्वाधिक प्रभावित होने वाले प्लेयर

  • सभी फोन, लैपटॉप आदि के लिए एक सामान्य चार्जर का निर्देश सबसे बड़े प्लेयर Apple को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा क्योंकि Apple का iPhone अभी भी चार्जिंग के लिए लाइटिंग पोर्ट का उपयोग कर रहा है और इसके लिए बाजार में अधिकांश अन्य Android Phones की तुलना में एक अलग केबल की आवश्यकता होती है।
  • एप्पल का लाइटनिंग पोर्ट भारतीय स्मार्ट फोन बाजार सैमसंग, xiaomi ओप्पो, वीवो और रियलमी के शीर्ष पांच ब्रांडों से बिल्कुल अलग है।
  • सभी पांच ब्रांड टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट वाले फोन पर स्विच कर चुके हैं इसलिए चार्जर को एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • सैमसंग ने पर्यावरणीय स्थिरता को प्रोत्साहित करने के लिए अपने उपकरणों से चार्जर और केबल को पूरी तरह से हटा दिया है।

दुनिया भर में मामला

  • यूरोपीय संघ द्वारा जून में ‘सभी उपकरणों के लिए एक चार्जर’ का विचार भी प्रस्तावित किया गया था।
  • इसमें तर्क फिर से वही दिया गया कि ई-कचरे की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है क्योंकि उपयोगकर्ताओं को कई चार्जर खरीदने पड़ते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है।

लाभ

  • फास्ट चार्जिंग का समर्थन करने वाले उपकरणों के लिए चार्जिंग गति को भी सुसंगत बनाया गया है जिससे उपयोगकर्ता अपने उपकरणों को किसी भी संगत चार्जर के साथ समान गति से चार्ज कर सकते हैं।
  • उपभोक्ताओं को नए उपकरणों की चार्जिंग विशेषताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी प्रदान की जाएगी जिससे उनके लिए यह जानना आसान हो जाएगा कि उनके मौजूदा चार्जर इसके अनुकूल हैं या नहीं।
  • खरीदार यह भी चुन सकेंगे कि वे चार्जिंग डिवाइस के साथ नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदना चाहते हैं या नहीं।
  • इससे चार्जर्स का अधिक उपयोग होगा और अंततः इससे उत्पन्न होने वाले ई-कचरे की मात्रा कम होगी।
  • यह वायरलेस चार्जिंग तकनीक की दिशा में तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।