यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पोर्टल (Professor of Practice Portal)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में उद्योग विशेषज्ञों की भर्ती की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है।

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पोर्टल के बारे में

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 उद्योग और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए कौशल आधारित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करके उच्च शिक्षा को बदलने का प्रयास करती है।
  • एनईपी सामान्य शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत करने और उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की भी सिफारिश करती है।
  • यूजीसी ने ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नामक पदों की एक नई श्रेणी के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों में उद्योग और अन्य पेशेवर विशेषज्ञता लाने के लिए एक नई पहल की है।
  • यह वास्तविक दुनिया की प्रथाओं और अनुभवों को कक्षाओं में ले जाने में मदद करेगा और एचईआई में संकाय संसाधनों को भी बढ़ाएगा।
  • इसके फलस्वरूप, प्रासंगिक कौशल से लैस प्रशिक्षित स्नातकों से उद्योग और समाज लाभान्वित होंगे।

उद्देश्य

  • उद्योग और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पाठ्यक्रम विकसित करना और एचईआई को संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं और परामर्श सेवाओं पर उद्योग के विशेषज्ञों के साथ काम करने में सक्षम बनाना जो पारस्परिक रूप से लाभप्रद होगा।
  • इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, प्रबंधन, चार्टर्ड एकाउंटेंसी (सीए), वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, मीडिया, साहित्य, ललित कला, सिविल सेवा, सशस्त्र बल, विधिक सेवा और लोक प्रशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को शैक्षणिक संस्थानों में लाना।
  • उच्च शिक्षा संस्थानों को औपचारिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ जुड़ने में सक्षम बनाना और उन्हें अनुभवात्मक शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, कौशल, उद्यमिता और विस्तार में भाग लेने और सलाह देने की भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कर्त्तव्य और जिम्मेदारियां

  • पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्चा के विकास और डिजाइनिंग में शामिल होना।
  • नए पाठ्यक्रम शुरू करना और संस्थागत नीतियों के अनुसार व्याख्यान देना।
  • छात्रों को नवाचार और उद्यमिता परियोजनाओं में प्रोत्साहित करना और इन गतिविधियों के लिए आवश्यक सलाह प्रदान करना।
  • संवर्धित उद्योग-अकादमिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना।
  • संस्थान के नियमित संकाय सदस्य के सहयोग से संयुक्त रूप से कार्यशाला, सेमिनार आयोजित करना, विशेष व्याख्यान और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • संबंधित एचईआई के नियमित संकाय सदस्य के सहयोग से संयुक्त अनुसंधान परियोजना या परामर्श सेवाएं प्रदान करना।

कार्यकाल

  • अनुबंध शुरू में एक वर्ष तक के लिए हो सकता है।
  • प्रारंभिक नियुक्ति के बाद विस्तार हेतु, उच्च शिक्षा संस्थान एक आकलन करेगा और सेवा विस्तार के बारे में निर्णय लेगा।
  • किसी दिए गए संस्थान में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की सेवा की अधिकतम अवधि तीन वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए और असाधारण मामलों में एक वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है और कुल सेवा अवधि किसी भी परिस्थिति में चार वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अनुबंध की श्रेणियाँ

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को निम्नलिखित श्रेणियों में से एक में नियुक्त किया जा सकता हैः

  • इंडस्ट्रीज द्वारा वित्त पोषित प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस।
  • एचईआई द्वारा अपने स्वयं के संसाधनों से वित्त पोषित प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस।
  • मानद आधार पर प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस।