यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: लम्पी स्किन डिजीज - एलएसडी (Lumpy Skin Disease)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) नामक वायरल संक्रमण के कारण राजस्थान और गुजरात में लगभग 3,000 पशुओं की मौत हो चुकी है।
  • लगभग 11 लाख पशुओं को इस बीमारी के खिलाफ टीका लगाया गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने गुजरात, राजस्थान और पंजाब को बकरी पॉक्स के टीके की 28 लाख खुराक की आपूर्ति की है जिसे हेस्टर बायोसाइंसेज नामक एक निजी संस्था से खरीदा गया है।
  • पशु-पालकों और डेयरी किसानों को बीमारी से निपटने में मार्गदर्शन करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन-1962 भी शुरू की गई है।

लम्पी स्किन डिजीज

  • लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) कैप्रीपॉक्स (Capripox) नामक वायरस के कारण होता है और यह दुनिया भर में पशुधन के लिए एक उभरता हुआ खतरा है।
  • यह आनुवंशिक रूप से बकरीपॉक्स और शीपपॉक्स वायरस परिवार से जुड़ा है।
  • यह पशुओं और भैंसों को रक्तदान करने वाले कीड़ों जैसे रोगवाहकों के माध्यम से संक्रमित करता है।

लक्षण

  • प्रमुख लक्षणों में जानवर की खाल या त्वचा पर गांठ जैसी दिखने वाली गोलाकार सख्त गांठों का पड़ना शामिल है।
  • संक्रमित पशु वजन कम करना शुरू कर देते हैं, दूध की उपज कम हो जाती है,  बुखार, मुंह में घाव भी शामिल हैं।
  • नाक और लार का अत्यधिक स्राव अन्य लक्षण हैं।
  • गर्भवती गायों और भैंसों को इस बीमारी के कारण गर्भपात हो सकता है जिससे उनकी मृत्यु हो सकती है।

लम्पी स्किन डिजीज के प्रकोप का इतिहास

  • यह रोग अधिकांश अफ्रीकी देशों में स्थानिक है। 2012 से मध्य-पूर्व, दक्षिण -पूर्व यूरोप और पश्चिम-मध्य एशिया में प्रकोप अधिक तेजी से हुआ है।
  • 2019 से, एशिया में एलएसडी के कई प्रकोपों की सूचना मिली है। इस साल मई में, पाकिस्तान के पंजाब में भी एलएसडी के कारण 300 से अधिक पशुओं की मौत की सूचना है।
  • सितंबर 2020 में, महाराष्ट्र में इस वायरस का एक स्ट्रेन पाया गया। गुजरात में पिछले कुछ वर्षों से छिटपुट रूप से मामले सामने आए हैं।
  • चिंता की बात यह है कि रिपोर्ट की जा रही मौतों की संख्या अधिक है एवं टीकाकरण उस दर से नहीं हो रहा है जिस दर से यह बीमारी फैल रही है।
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) जिसका भारत एक सदस्य है, के अनुसार मृत्यु दर 1.5 प्रतिशत सामान्य मानी जाती है।

क्या इंसान खतरे में हैं?

  • यह रोग जूनोटिक नहीं है अर्थात यह पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता है, इसीलिए मनुष्य इससे संक्रमित नहीं हो सकते हैं।
  • संक्रमित पशु द्वारा उत्पादित दूध उबालने या पाश्चुरीकरण के बाद मानव उपभोग के लिए उपयुक्त होगा क्योंकि दूध में यदि कोई वायरस होगा तो ये प्रक्रिया उसे मार देगी।

क्या प्रसार को रोका जा सकता है?

  • एलएसडी का सफल नियंत्रण और उन्मूलन शीघ्र पता लगाने पर निर्भर करता है, इसके बाद तेजी से और व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।
  • पशु-शेडों के कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए कीटनाशकों और कीटाणुनाशक रसायनों के छिड़काव का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • संक्रमित मवेशियों को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए और संक्रमित पशु के इलाज के लिए निकटतम पशुचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।