यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: कोविड 19 एवं बाल विवाह (COVID-19 and Child Marriage)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): कोविड 19 एवं बाल विवाह (COVID-19 and Child Marriage)

कोविड 19 एवं बाल विवाह (COVID-19 and Child Marriage)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में जारी ग्लोबल गर्लहुड रिपोर्ट 2020 (The Global Girlhood Report 2020) के अनुसार कम से कम आधा मिलियन (halfa-million) लड़कियों को जबरन बाल विवाह का शिकार होने का खतरा है।

प्रमुख बिन्दु

  • कोविड-19 महामारी से पहले, भारत उन देशों में से एक था, जहां बाल विवाह के खिलाफ अभियान चरम पर था। भारत ने शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ कई प्रयास किए, किन्तु गरीबी और जागरूकता की कमी के चलते अभी भी बाल विवाह विभिन्न राज्यों में हो रहे हैं।
  • सेव द चिल्ड्रन रिपोर्ट (Save the Children report) कहती है कि अगले पांच साल में कोरोना महामारी के कारण 2.5 मिलियन लड़कियों की शादी जल्दी हो सकती है।
  • गरीबी का सीधा संबंध बाल विवाह से है, बालिकाओं की पहुंच पहले से ही संसाधनों तक नहीं है । इसके अतिरित्तफ़ उसे परिवार या समाज में बोझ माना जाता है। इन्ही सब वजहों से बालिकाएँ जल्दी शादी करने के लिए मजबूर हो जाती हैं।

बाल विवाह का दुष्प्रभाव

  • ऐसे समय में जब प्रजनन और यौन स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं, लड़की और उसके अजन्मे बच्चे का जीवन अधिक जोखिम में होता है।
  • बाल विवाह बच्‍चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है जिससे उनपर हिंसा, शोषण तथा यौन शोषण का खतरा बना रहता है। बाल विवाह लड़कियों और लड़कों दोनों पर असर डालता है, लेकिन इसका प्रभाव लड़कियों पर अधिक पड़ता है।
  • बाल विवाह, बचपन खत्‍म कर देता है। बाल विवाह बच्‍चों की शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और संरक्षण पर नकारात्‍मक प्रभाव डालता है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता है।
  • जिस लड़की की शादी कम उम्र में हो जाती है, उसके स्‍कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती है तथा उसके कमाने और समुदाय में योगदान देने की क्षमता कम हो जाती है। उसे घरेलू हिंसा तथा एचआईवी / एड्स का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। खुद नाबालिग होते हुए भी उसकी बच्‍चे पैदा करने की संभावना बढ़ जाती है। गर्भावस्‍था और प्रसव के दौरान गंभीर समस्‍याओं के कारण अकसर नाबालिग लड़कियों की मृत्यु भी हो जाती है।
  • बाल विवाह, समाज की जड़ों तक फैली बुराई, लैंगिक असमानता और भेदभाव का ज्वलंत उदहारण है। यह आर्थिक और सामाजिक ताकतों की परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया का परिणाम है।

भारत में बाल विवाह

  • भारत में बाल विवाह में आई कमी की वजह से दुनियाभर में इस प्रथा के चलन में भी गिरावट आई है। यह कमी कई कारणों से हो सकती हैं जैसे माताओं का अधिक साक्षर होना, लड़कियों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलना, सरकार के सख्‍त कानून और गांव के लोगों का शहरों की तरफ पलायन।
  • लड़कियों की शिक्षा में तेजी से बढ़ोतरी, नाबालिग लड़कियों के लिए सरकार की योजनाएं और बाल विवाह का गैर कानूनी होने तथा इसके नुकसान पर सशक्त सार्वजनिक संदेश इस बदलाव के अन्‍य कारण हैं।

बाल विवाह रोकने के लिए प्रयास

  • स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल संरक्षण, पोषण एवं जल व साफ-सफाई पर मौजूदा योजनाओं को एक सिरे में बांधकर बाल विवाह की समस्या को सर्वांगीण रूप से खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रयास एक बच्चे के संपूर्ण जीवनचक्र में बाल विवाह को रोकने के लिए है, खासतौर पर उन गूढ़ नकारात्मक सामाजिक प्रथाओं को चुनौती देकर जो भारत में इस समस्या के पनपने के सबसे बड़े कारण हैं।
  • भारत में 1 नवंबर 2007 को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू हुआ। इसमें बाल विवाह करना या करवाना संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है। जो माता-पिता अपने पुत्र पुत्रियों का बाल विवाह करवाते हैं तो उन्हें 2 वर्ष का कारावास व 1 लाख रुपयों का दंड देने का प्रावधान है।