यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - IV (सामान्य अध्ययन - 3) - 12, अक्टूबर 2018


यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-4: सामान्य अध्ययन-3: (प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा- प्रबंधन)

प्रश्न -  सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में भारत को खाद्य प्रसंस्करण हब बनाने हेतु कुछ विशेष पहल किये गए हैं, परन्तु इसके कोई संतोषजनक परिणाम नहीं दिख रहे है’’ क्या आप इस बात से सहमत हैं कि एक बेहतर खाद्य प्रसंस्करण व्यवस्था भारतीय कृषि की दशा में भी अपेक्षित सुधार कर सकती हैं? चर्चा करें |

मॉडल उत्तर:

दृष्टिकोण

  • भारतीय कृषि की वर्तमान समस्याएँ एवं खाद्य प्रसंस्करण की स्थिति;
  • खाद्य प्रसंस्करण तंत्र में सुधार कर भारतीय कृषि में किए जाने वाले सुधार;
  • सरकार के द्वारा किए गए पहल
  • मुख्य चुनौतियाँ
  • निष्कर्ष

भारत में कृषि क्षेत्र की केन्द्रीय भूमिका होने के बावजूद भी, अब तक खाद्य प्रसंस्करण तंत्र में कोई संतोषजनक प्रगति नहीं देखी गई है। जबकि निम्न उत्पादकता, कृषि उपजों का खेतों पर खराब होना व उनका उचित मूल्य नहीं मिलने के साथ-साथ व्यापक कृषि आधार होने के बावजूद भी न्यूनतम कृषिगत निर्यात जैसी समस्याओं का सामना कर रहे भारतीय कृषि के लिए खाद्य प्रसंस्करण की भूमिका को पहचानना अनिवार्य है।

भारत में खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को बेहतर बनाकर कृषि क्षेत्र की वर्तमान समस्याओं का प्रभावी हल ढूँढ़ा जा सकता है। वे कुछ इस प्रकार हो सकते हैं—

कृषि की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका

  • भारत का कृषि उत्पादन (फसली उत्पाद एवं हार्टिकल्चर उत्पाद) की दृष्टि से विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें देश की लगभग दो तिहाई जनसंख्या अपने आय एवं रोजगार के लिए जुड़ी हुई है। अतः एक बेहतर खाद्य प्रसंस्करण तंत्र का निर्माण अनिवार्य है। इसके द्वारा कृषि को अर्थव्यवस्था में उच्च वृद्धि दर वाले क्षेत्र के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।

कृषि निर्यात में वृद्धि

  • खाद्य प्रसंस्करण इकाई की भूमिका कृषि को उद्योग व विनिर्माण से जोड़ने के लिए किया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप खाद्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन करना व उन्हें प्रसंस्करित कर अधिक समय तक संरक्षित करने योग्य बनाया जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष लाभ यह हो सकता है, कृषि क्षेत्र को घरेलू व अन्तर्राष्ट्रीय निर्यात व्यापार श्रृंखला से जोड़ा जा सकता है।

फार्म-आधारित क्षय पर नियंत्रण

  • प्रसंस्करण व पैकेजिंग, खाद्य प्रसंस्करण के दो मूलभूत इकाई है जिसका प्रत्यक्ष लाभ फार्म-आधारित फसल क्षय को खत्म करने में किया जा सकता है। भारत में सुविधाओं की अभाव में फल व सब्जियों के नष्ट होने के वर्तमान उदाहरणों को इस सँदर्भ में देखा जा सकता है।

सशक्त आपूर्ति तंत्र का निर्माण

  • प्रसंस्करित व डब्बाबंद होने पर खाद्य उत्पादों को भंडारित करने व उनको परिवहन करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे देश के विभिन्न इलाकों में एवं विभिन्न मौसमों में आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति में होने वाली कमी के परिणामस्वरूप उत्पन्न मुद्रास्फीति को भी नियंत्रित किया जा सकता है। अर्थात् एक मजबूत आपूर्ति तंत्र के निर्माण के द्वारा कृषि उत्पादों केे मूल्य को नियंत्रित व कृषकों को उचित मूल्य प्रदान किया जा सकता है।
  • कृषकों की आय में वृद्धि कर कृषि निवेश में वृद्धि करना संभव है जो अंततः ग्रामीण विकास की प्रक्रिया को भी सुनिश्चित करेगा।

फसल विविधीकरण

  • इसके अतिरिक्त विभिन्न खाद्य उत्पादों, जैसे फल, फूल, सब्जियां तथा दाल आदि का प्रसंस्करण उद्योग में माँग बढ़ने के कारण कृषकों द्वारा फसल विविधिकरण (Crop Diversification) के लिए नवीन विकल्प के रूप में स्थान दिया जाएगा।

खाद्य प्रसंस्करण की उक्त भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से किए गए कुछ महत्वपूर्ण पहल इस प्रकार हैंः–

खाद्य प्रसंस्करण के लिए राष्ट्रीय मिशन

  • खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा 2012 में एक केन्द्र समर्थित योजना के रूप में प्रारंभ किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों व UT's को साथ में लेकर देश में विकेन्द्रीकृत रूप से खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रयासों व योजनाओं का क्रियान्वयन करना है।
  • मिशन के अंतर्गत मुख्य रूप से केन्द्रीय मंत्रालय के प्रभाव को बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है। इससे देश भर में खाद्य प्रसंस्करण पहलों के सफल सुपरविजन, मॉनिटरिंग तथा नियोजन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मेगा फूड पार्क

  • मेगा फूड पार्क स्कीम का लक्ष्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को साथ लाकर कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने के लिए एक तंत्र उपलब्ध करवाना है। अर्थात् इसके द्वारा मूल्य संवर्द्धन में वृद्धि (Maximizing Value addition), बर्बादी को कम (Minimizing Wastage) तथा किसानों की आय में वृद्धि करना मूल लक्ष्य है के रूप में शामिल हैं, विशेषकर जिससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें।
  • साथ ही मेगा फूड पार्क स्कमी कलस्टर दृष्टिकोण पर आधारित स्कीम है और इसमें सुगठित आपूर्ति श्रृंखला के साथ-साथ आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों की स्थापना करने के लिए सुपरिभाषित कृषि/बागवानी क्षेत्र में अत्याधुनिक अवसंरचना का सृजन करने की परिकल्पना की गई है।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

  • भारत सरकार के द्वारा, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के रूप में एक नवीन केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम का अनुमोदन किया गया। इसके अंतर्गत 2016-20 तक की अवधि के लिए 6000 करोड़ का आवंटन किया गया है।
  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य खेतों से लेकर रिटेल स्टोर तक एक सक्षम आपूर्ति श्रृंखला निर्मित करना है। इसके अंतर्गत एकीकृत कोल्ड चेन, (Integerated cold chain) मूल्य संवर्द्धन करने वाली अवसंरचना निर्माण एवं खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता को बढ़ाया जाना शामिल होगा।

शोध एवं गुणवत्ता परीक्षण तंत्र

  • गुणवत्ता मापन, शोध एवं विकास (R&D) एवं CODEX स्टैन्डर्ड से जुड़ी योजनाओं के द्वारा खाद्य प्रसंस्करण का प्रोत्साहन करने की महत्वपूर्ण पहल की गई है।

परन्तु भारत में खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को विकसित करने के सँदर्भ में कुछ प्रमुख चुनौतियां भी हैं, जो इस प्रकार है–

आपूर्ति पक्ष के अवरोध (Supply Side bottlenecks)

  • छोटे एवं बिखरे हुए जोतों के कारण बाजार में विक्रय योग्य अधिशेष (Marketable Surplus) की कमी।
  • निम्न फसल उत्पादकता
  • मौसम आधारित कृषि होना;
  • फसल बर्बाद होना;
  • आपूर्ति एवं गुणवत्ता मूल्याँकन पक्ष की कमी; लैब टेस्टिंग एवं गुणवत्ता मापन तंत्र का अभाव।

अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ

  • अपर्याप्त कोल्ड-चेन अवसरंचना
  • अपर्याप्त लॉजिस्टिक सुविधा एवं परिवहन साधनों का अभाव;

नियमन की कमी

  • खाद्य सुरक्षा एवं पैकेजिंग से संबंधित मुद्दों को विभिन्न कानूनों, विभागों तथा मंत्रालयों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • एक पैकेज्ड खाद्य पदार्थ निर्माता को विभिन्न कानूनों का पालन करना अनिवार्य है, उदाहरणस्वरूप- The standard of Weights & Measures (Packaged Commodities) Rules, Prevention of Food Adulteration (PFA) and Fruits Products Order (FPO)आदि।

इस प्रकार देश को एक बेहतर खाद्य एवं प्रसंस्करण तंत्र प्रदान करने हेतु एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें सरकार के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र को शामिल कर उपयुक्त वातावरण को निर्मित किया जाना चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम घरेलू बाजार में प्रसंस्करण उद्योग में उत्पादनकर्ता के लिए कच्चे माल एवं आवश्यक अवसंरचना को कम मूल्य पर उपलब्ध करवाना होगा। तथापि गुणवत्ता मूल्याँकन शोध व अनुसंधान व्यवस्था को बढ़ावा देकर घरेलू उत्पादन को एक मानक स्वरूप प्रदान करना भी आवश्यक होगी। इसके अतिरिक्त, कृषकों के आय स्तर को बढ़ाने के लिए बिचौलियों को खत्म कर ई-नाम (e-nam) जैसे संस्थागत कृषि बाजारों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा सकता है। अंततः ग्रामीण विकास एवं अन्य पहलों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में निवेश में वृद्धि कर उपयुक्त वातावरण को निर्माण करने पर बल दिया जाना चाहिए।

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